आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा
पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा
अरमान ही बरसो तक जला करते है हमेशा ,
इंसान तो इक पल मे खाक हो जाता है !!
लगता है जैसे कोई खूबसूरत शाम है…देखा तो पाया आपकी हंसी का खुमार है…जो आज के दिन चॉकलेट की तरह…हवाओ में भी घुला प्यार की मिठास है…!
इसी कशमकश में गुजर जाता है दिन
कि तुमसे बात करूं
या तुम्हारी बात करूं