वो फूल ही क्या जिसमे खुशबू ना हो
वो जाम ही क्या जिसमे नशा ना हो,
और
वो सच्चा आशिक ही क्या
जिसे इश्क में दो चार पड़ी ना हो..!!
उठाये जो हाथ उन्हें मांगने के लिए,
किस्मत ने कहा, अपनी औकात में रहो।
इश्क़ वही है जो हो एकतरफा हो
इज़हार-ऐ-इश्क़ तो ख्वाहिश बन जाती है
है अगर मोहब्बत तो आँखों में पढ़ लो ज़ुबान से इज़हार तो नुमाइश बन जाती है
लिखूं कुछ आज यह वक़्त का तक़ाज़ा है,
मेरे दिल का दर्द अभी ताज़ा ताज़ा है,
गिर पड़ते हैं मेरे आँसू मेरे ही काग़ज़ पर
लगता है कलम में स्याही का दर्द ज़्यादा है!!
कैसे एक लफ्ज़ में बयां कर दूँ
दिल को किस बात ने उदास किया