आंसुओं की किम्मत क्या हैहम बखुबी समझते है ।वो कोई और होंगे ए सनमजो ओस को शबनम समझते है ॥
तेरी यादों की कोई सरहद होती तो अच्छा था
खबर तो रहती….सफर तय कितना करना है
Palkon Ki Hadd Ko Tod Kar Daaman Pe Aa Giraa,
Ek Ashq Mere Sabar Ki Toheen Kar Gayaa.
तो क्या हुआ जो आप नहीं मिलते हमसे.,मिला तो रब भी नहीं हमसे,पर इबादत कहां रुकी हमसे..