कोई पुछ रहा हे मुजसे मेरी जीन्दगी की कीमंत....मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना......
तेरा प्यार मेरी जिंदगी में
बहार ले कर आया है,
तेरे आने से पहले हर दिन
पतझड़ हुआ करता था।
ज़ुल्म इतना ना कर के लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा…!!
हमने ज़माने को तुझे अपनी “ जान ” बता रक्खा है…!!
दामाद 14 दिनों से ससुराल में था.
सास :- दामाद जी कब वापस जा रहे हो..दामाद :- क्योँ
सास :- बहुत दिन हो गये..दामाद :- आपकी बेटी तो छ: छ: महीने मेरे यहाँ रहती है..
सास :- वो तो वहाँ ब्याही गयी है..दामाद :- और मैं क्या यहाँ अपहरण करके लाया गया हूँ..
हाथ पर घड़ी कोईभी बँधी हो,
लेकिन वक़्त अपनाहोना चाहिए!!