मैंने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं मेरे चाँद सा हसीनचाँद ने कहा - " हाँ बहुत बहुत लोगो के साथ"
😃😘😊😩😜😂😳😄😀😳
संता और बंता दोनों भाई एक
ही क्लास में पढ़ते थे।
अध्यापिका: तुम दोनों ने अपने पापा का नाम अलग-अलग क्यों लिखा?
संता: मैडम फिर आप कहोगे नक़ल मारी है, इसीलिए।
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दुःख में इंसान ईश्वर को याद करता है लेकिन सुख में इंसान ईश्वर को भूल जाता है।
अगर सुख में भी इंसान ईश्वर के करीब रहे तो दुःख ही क्यों हो
ये दबदबा,ये हुकुमत,ये नशा, ये दौलतें………
सब किरायदार है, घर बदलते रहते हैं……
“देर रत जब किसी की याद सताए,
ठंडी हवा जब जुल्फों को सहलाये.
कर लो आंखे बंद और सो जाओ क्या पता,
जिसका है ख्याल वो खवाबों में आ जाये.”