अगर पटाखे और फुलजड़ी का नाम सुनते ही आपके दिमाग में लडकियों का ख्याल जाता है तो मेरे दोस्त बर्बाद हो चुके हो तुम...
किसी भी मुशकिल का अब किसी को हल नही मिलता ,
शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नही निकलता
हर रात को तुम इतना
याद आते हो के हम भूल गए हैं,
के ये रातें ख्वाबों के लिए होती हैं,
या तुम्हारी यादों के लिए
वो इस तरह मुस्कुरा रहे थे , जैसे कोई गम छुपा रहे थे !!
बारिश में भीग के आये थे मिलने , शायद वो आंसु छुपा रहे थे !
टीचर – अच्छा तो बच्चों
आज मैं तुम्हारा टेस्ट लूंगी
टीचर – बंटू कबीर दास का
एक दोहा सुनाओ
बंटू –
कबीर दास है बाबरो, दोहा गयो बनाय
खुद तो कबको चली गयो, हमको गयो फसाय
टीचर बेहोश