अर्ज किया है....तुम मुझे "तुम" कहकर ही बुलाओ..तो बेहतर है... ये "AAP" मुझे ना जाने क्यों.. "केजरीवाल" सा लगता है
उसको चाहा पर इजहार करना नही आया,
कट गयी उम्र हमें प्यार करने नही आया,
उसने कुछ माँगा भी तो मागी रजाई,
और हमे इंकार करना नही आया....
लम्हे वो कुछ खास होते है…तू जो मेरे पास होती है…बाहों में तेरा कुछ होता ऐसा एहसास है..डेरी मिल्क और पार्क की जो मिठास है…!
दर्द दे कर इश्क़ ने हमे रुला दिया,
जिस पर मरते थे उसने ही हमे भुला दिया,
हम तो उनकी यादों में ही जी लेते थे,
मगर उन्होने तो यादों में ही ज़हेर मिला दिया.
चाहत तुम्हारी - रविवार की तरहहकीकत जिंदगी - सोमवार की तरह...!!