Ummidon ki manzil de gayi,Khwabon ki duniya be gayi,Abe teri kya izzat reh gayi,Jab ek zakkas item tere ko RAKHI pehna gayi...
जीत किसके लिए,हार किसके लिए,जिन्द गी भर यह तकरार किसके लिए,जो भी आया है वो जाऐगा एक दिन,फिर ये अहंकार किसके लिए।..
उम्र ने तलाशी ली, तो जेबों से लम्हे बरामद हुए..कुछ ग़म के, कुछ नम थे, कुछ टूटे, कुछ सही सलामत थे..
अब तू नहीं है दुनिया में,
हु अकेला वही खड़ा,
तू मुमताज़ तो बन गयी
मै रह गया निचे पड़ा!
गुलाब को भी कमल बना देते,
उसकी एक अदा पे कई ग़ज़ल बना देते…
कम्भख्त मरती नहीं मुझ पर लडकियां,
वरना लखनऊ में भी ताजमहल बना देते…
रामायण देखते हुए
बेटा – पापा, राजा दशरथ की 3 रानियां थीं,
लेकिन मेरी तो एक ही मम्मी है ?
पापा – हाँ बेटा,
काश मेरी भी 3 पत्नियां होतीं
अंदर से मम्मी की आवाज आयी
अभी 12 बजे इसे महाभारत दिखाउंगी जिसमें द्रोपदी के 5 पति थे
एकदम सन्नाटा छा गया