तेरी बेखुदी में लाखो पैगाम लिखते है,
तेरे गम में जो गुजरी बात तमाम लिखते हैं,
अब तो पागल हो गई वो कलम,
जिस से हम तेरा नाम लिखते है…
ज़ुबाँ पर बेखुदी में नाम उसका आ ही जाता है, अगर पूछे कोई ये कौन है बतला नहीं सकता।
तेरी बेखुदी में लाखो पैगाम लिखते है, तेरे गम में जो गुजरी बातें तमाम लिखते है, अब तो पागल हो गई वो कलम, जिस से हम तेरा नाम लिखते है!!
बेखुदी में बस एक इरादा कर लिया इस दिल की चाहत को हद से ज्यादा कर लिया जानते थे वो इसे निभा न सकेंगे पर उन्होंने मजाक और हमने वादा कर लिया।
तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलकों पर,जब भीग कर कहती है की अब रोया नहीं जाता।