बहुत भीड़ है, इस मोहब्बत के शहर में।
एक बार जो बिछड़ा, वो दोबारा नहीं मिलता।
बोलो है कोई वकील ऐसा इस जहान में
जो हारा हुआ इश्क जीता सके मुझको
हर रिश्ते में विश्वास रहने दो;
जुबान पर हर वक़्त मिठास रहने दो;
यही तो अंदाज़ है जिंदगी जीने का;
न खुद रहो उदास, न दूसरों को रहने दो।
ज़ुल्म इतना ना कर के लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा…!!
हमने ज़माने को तुझे अपनी “ जान ” बता रक्खा है…!!
ज़िदगी जीने के लिये मिली थी,
लोगों ने सोच कर गुज़ार दी……