चांद को बैठाकर पहरों पर, तारों को दिया निगरानी का
काम एक रात सुहानी आपके लिए, एक स्वीट सा “ड्रीम”
आपकी आँखों के नाम।💌
जब खामोश आँखो से बात होती है,ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,तुम्हारे ही ख़यालो में खोए रहते हैं,पता नही कब दिन और कब रात होती है...
ए पलक तु बन्द हो जा,ख्बाबों में उसकी सूरत तो नजर आयेगी,इन्तजार तो सुबह दुबारा शुरू होगी,कम से कम रात तो खुशी से कट जायेगी|
कितनी जल्दी ज़िन्दगी गुज़र जाती है,प्यास भुझ्ती नहीं बरसात चली जाती है,तेरी याद कुछ इस तरह आती है,नींद आती नहीं मगर रात गुज़र जाती है।
चाँद तारो से रात जगमगाने लगी,
फूलों की खुश्बू से दुनिया महकने लगी,
सो जाइये रात हो गयी है काफ़ी,
निंदिया रानी भी आपको देखने है आने लगी