मजबूर और मजबूत में ज्यादा फर्क नही है,
स्वार्थी मनुष्य से दोस्ती करोगे तो वो आपको मजबूर बना देगा और
सच्चे मनुष्य से दोस्ती करोगे तो वो आपको मजबूत बनाएगा ।
क्यों मरते हो यारो सनम के लिए,ना देगी दुप्पटा कफ़न के लिए,मरना है तो मारो वतन के लिए,तिरंगा तो मिलेगा कफ़न के लिए.
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए,
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए|
पैसे से बिस्तर खरीदा जा सकता है, नींद नहीं
पैसे से महल खरीदा जा सकता है लेकिन खुशियाँ नहीं
“लोग क्या कहेंगे”- ये बात इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती