तैरना तो आता था हमें लेकिन जब उसने हाथ नहीं पकड़ा तो डूब जाना बेहतर लगा 1 8 0
हाथ नहीं पकड़ा तो डूब जाना बेहतर लगा
शायरी सर्दी की ठिठुरती रात में फुटपाथ पर अरमान है
दिलबर मुझे छोड़के किसी और पे मेहरबान है.....
Khushi hoti hai bahot
Use khush dekh kar
Mere sath na sahi
Kisi aur ke sath dekh kar.
मुझे ना सताओ इतना कि मैं रुठ जाऊं तुमसे,
मुझे अच्छा नहीं लगता अपनी साँसों से जुदा होना।
खुदा की फुर्सत में एक पल आया होगा,
जब उसने तुझ जैसा प्यारा इंसान बनाया होगा,
न जाने कौन से दुआ कुबूल हुई हमारी,
जो उसने मुझे तुझसे मिलाया होगा