मैं नदी तो,
तुम समन्दर हो,
चला कंही से,
पर तुम पर ठहरा हूँ,
मैं चाँद-सा,
रौशन हुआ तेरी रौशनी से,
एहसासो के पर्वतो पे,
तेरे संग चढ़ता हूँ,
मुझे अब अपनी,
पनाहो में जगह दे दो,
मुझे तुमसे,
बे-पनाह मोह्हबत है,
तुम भी थोड़ा सा,
मोह्हबत दे दो "
तेरे ख्याल से खुद को छुपा के देखा है,दिल-ओ-नजर को रुला-रुला के देखा है,तू नहीं तो कुछ भी नहीं है तेरी कसम,मैंने कुछ पल तुझे भुला के देखा है।
उनका भी कभी हम दीदार करते है,उनसे भी कभी हम प्यार करते है,क्या करे जो उनको हमारी जरुरत न थी,पर फिर भी हम उनका इंतज़ार करते है..!!
भरम रखो मोहब्बत का
वफ़ा की शान बन जाओ,
किसी पर जान देदो या
किसी की जान बन जाओ,
तुम्हारे नाम से मुझको
पुकारें ये जहाँ वाले
मैं बन जाऊं अफसाना
और तुम उन्वान बन जाओ।
चेहरे पर हंसी छा जाती है,
आँखों में सुरूर आ जाता है,
जब तुम मुझे अपना कहते हो,
मुझे खुद पर गुरुर आ जाता है।