मैं नदी तो,
तुम समन्दर हो,
चला कंही से,
पर तुम पर ठहरा हूँ,
मैं चाँद-सा,
रौशन हुआ तेरी रौशनी से,
एहसासो के पर्वतो पे,
तेरे संग चढ़ता हूँ,
मुझे अब अपनी,
पनाहो में जगह दे दो,
मुझे तुमसे,
बे-पनाह मोह्हबत है,
तुम भी थोड़ा सा,
मोह्हबत दे दो "
मुझको फिर वही सुहाना नजारा मिल गया,
इन आँखों को दीदार तुम्हारा मिल गया,
अब किसी और की तमन्ना क्यूँ मैं करूँ,
जब मुझे तुम्हारी बाहों का सहारा मिल गया।
Saja Kr Apni Hi Aankh Hazaar Chehron Pe,
Kia Hai Main Ne Sadaa Aitbaar Chehron Pe
Main Teri Bazm Mein Kis Kis Sy Dushmani
Lita Likha Tha Naam Tera Be
shumaar Chehron Pe..!!!
मै खुद लिखता हूँ मोहब्बत
तुम आइने को संवार लो
मै अपनी खुशबु बिखेर देता हूँ
तुम अपनी जुल्फों को सवार लो
तेरा इंतेज़ार मुझे हर पल रहता है,
हर लम्हा मुझे तेरा एहसास रहता है,
तुझ बिन धड़कने रुक सी जाती है,
की तू मेरे दिल मे मेरी धड़कन बनके रहता है!!