जो रिश्ता हमको रूला दें,उससे गहरा रिश्ता कोई नहीं,जो रिश्ता रोते हुए छोड़ दें,उससे कमजोर रिश्ता कोई नहीं,बूरे वक्त में भी जो रिश्ता निभाए,उससे बड़ कर रिश्ता कोई नहीं।
जो रिश्ता हमको रूला दें,
उससे गहरा रिश्ता कोई नहीं,
जो रिश्ता रोते हुए छोड़ दें,
उससे कमजोर रिश्ता कोई नहीं,
बूरे वक्त में भी जो रिश्ता निभाए,
उससे बड़ कर रिश्ता कोई नहीं।
सपने तो मेरे थे पर उनको पूरा करने का रास्ताकोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा….
सपने तो मेरे थे पर उनको पूरा करने का रास्ता
कोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा….
यकीन और दुआ नज़र नहीं आते मगर,
नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं।
भय से तब तक ही डरना चाहिये जब तक भय (पास) न आया हो। आये हुए भय को देखकर बिना शंका के उस पर् प्रहार् करना चाहिये।
जीवन में किसी को रूलाकरहवन भी करवाओगे तो कोई फायदा नहींऔरअगर रोज किसी एक आदमी को भी हंसा दियातो आपको अगरबत्ती भी जलाने की जरूरत नहीं!