एक चाहत होती है,अपनों के साथ जीने की,वरना पता तो हमें भी है,कि मरना अकेले ही है,मित्रता एवं रिश्तेदारी ‘सम्मान’ की नही ”भाव” की भूखी होती है,बशर्ते लगाव दिल से होना चाहिए,दिमाग से नही।
एक चाहत होती है,
अपनों के साथ जीने की,
वरना पता तो हमें भी है,
कि मरना अकेले ही है,
मित्रता एवं रिश्तेदारी ‘सम्मान’ की नही ”भाव” की भूखी होती है,
बशर्ते लगाव दिल से होना चाहिए,
दिमाग से नही।
भय से तब तक ही डरना चाहिये जब तक भय (पास) न आया हो। आये हुए भय को देखकर बिना शंका के उस पर् प्रहार् करना चाहिये।
यकीन और दुआ नज़र नहीं आते मगर,
नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं।
घमंड ही नहीं गुरुर है अपने किसान होने का।
बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की
सफलता ना मिले तो घबराना नही,
रुक कर सोचना तो पाओगे की ,
कुछ कदम चलना अभी शेष है।