एक चाहत होती है,अपनों के साथ जीने की,वरना पता तो हमें भी है,कि मरना अकेले ही है,मित्रता एवं रिश्तेदारी ‘सम्मान’ की नही ”भाव” की भूखी होती है,बशर्ते लगाव दिल से होना चाहिए,दिमाग से नही।
एक चाहत होती है,
अपनों के साथ जीने की,
वरना पता तो हमें भी है,
कि मरना अकेले ही है,
मित्रता एवं रिश्तेदारी ‘सम्मान’ की नही ”भाव” की भूखी होती है,
बशर्ते लगाव दिल से होना चाहिए,
दिमाग से नही।
जिंदजी में इन दो लोगो को बहौत प्यार करो।
एक माँ जो तुम्हे इस दुनिया में लाये
और एक बीवी जो सारी दुनिया छोड़ कर तुम्हारे पास आये
मुझे नहीं पता कि मैं एक बेहतरीन दोस्त हूँ या नहीं,
लेकिन मुझे पूरा यकीन कि जिनके साथ मेरी दोस्ती है…
वे बहुत बेहतरीन हैं।
भय से तब तक ही डरना चाहिये जब तक भय (पास) न आया हो। आये हुए भय को देखकर बिना शंका के उस पर् प्रहार् करना चाहिये।
अगर आप नेक इंसान हो और लोग आपको बुरा कहे तो चलेगा,
क्यूँकि यह इससे कही अच्छा है कि तुम बुरे हो और लोग तुम्हें अच्छा कहे.