बहुत सुन्दर शब्द सेवा करनी है तो, घड़ी मत देखो |प्रसाद लेना है तो, स्वाद मत देखो |सत्संग सुनाना है तो, जगह मत देखो |बिनती करनी है तो, स्वार्थ मत देखो |समर्पण करना है तो, खर्चा मत देखो |रहमत देखनी है तो, जरूरत मत देखो !!
मेरी खमोशियो के राज़ ख़ुद मुझे ही नहीं मालूम…
जाने क्यू लोग मुझे मगरूर समझते है…
बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है,आप खुश रहें, मेरा क्या है..मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।
न चांद होगा ना तारे होंगे,क्या हम इस साल भी कुंवारे होंगे ,इस दुनिया में कितनों के निकाह हो गए ,क्या हमारे नसीब में सिर्फ निकाह के छुहारे होंगे।
एक छुपी हुई पहचान रखता हूँ,
बाहर शांत हूँ, अंदर तूफान रखता हूँ,
रख के तराजू में अपने दोस्त की खुशियाँ,
दूसरे पलड़े में मैं अपनी जान रखता हूँ।