Facts on neptune, नेपच्यून ग्रह के बारे में रोचक फैक्ट्स

FACTS ON NEPTUNE, नेपच्यून ग्रह के बारे में रोचक फैक्ट्स

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It takes Neptune 164.8 Earth years to orbit the Sun. On 11 July 2011, Neptune completed its first full orbit since its discovery in 1846.

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Neptune is the Roman God of the Sea. In Greek, Neptune is called Poseidon.

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Neptune has the second largest gravity of any planet in the solar system – second only to Jupiter.

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The orbit path of Neptune is approximately 30 astronomical units (AU) from the Sun. This means it is around 30 times the distance from the Earth to the Sun.

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The largest Neptunian moon, Triton, was discovered just 17 days after Neptune itself was discovered.

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Neptune has a storm similar the Great Red Spot on Jupiter. It is commonly known as the Great Dark Spot and is roughly the size of Earth.

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Neptune also has a second storm called the Small Dark Spot. This storm is around the same size as Earth’s moon.

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Neptune spins very quickly on its axis. The planets equatorial clouds take 18 hours to complete one rotation. The reason this happens is that Neptune does not have a solid body.

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Only one spacecraft, the Voyager 2, has flown past Neptune. It happened in 1989 and captured the first close-up images of the Neptunian system. It took 246 minutes – four hours and six minutes – for signals from Voyager 2 to reach back to Earth.

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Like the other outer planets, Neptune possesses a ring system, though its rings are very faint. They are most likely made up of ice particles and grains of dust with a carbon-based substance coating them.

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Neptune has an average surface temperature of -214°C – approximately -353°F

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नेपच्यून का नाम समुद्र के रोमन देवता के नाम पर रखा गया था। यह इसलिए क्योंकि इस ग्रह का रंग समुद्र की तरह ही नीला है।

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नेपच्यून को पहली बार 1846 में खोजा गया था । इस ग्रह को Jean Joseph Le Verrier ने खोजा था । यह अन्य सभी ग्रहों की तुलना में बाद में पता चला था क्योंकि यह नग्न आंखों के लिए नहीं दिखाई देता है।

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नेपच्यून की खोज यूरेनस की कक्षा को देखकर हुई थी। जब यह देखा गया कि यूरेनस जब सूर्य की परिक्रमा कर रहा है तो वह अपनी कक्षा में स्थिर नहीं है वहां पर किसी और वस्तु के ग्रेविटी का प्रभाव है। वैज्ञानिकों ने इसी के आधार पर बाद में नेपच्यून की खोज की थी।

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नेपच्यून के लिए सूरज की एक पूरी परिक्रमा करने में 164.8 पृथ्वी साल लगते हैं। यह 60,190 पृथ्वी के दिनों के बराबर है! 1846 में खोजे जाने के बाद 2011 में जाकर के इस ग्रह ने सूर्य की एक पूरी परिक्रमा की थी।

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नेपच्यून गैसों से बना एक विसाल ग्रह है जिनमें यह 29% हीलियम, 80% हाइड्रोजन और मीथेन गैस के निशान की परतों से बना है। इसकी एक ठोस सतह नहीं है।

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नेप्च्यून में एक महान डार्क स्पॉट तूफान है। यह बृहस्पति पर ग्रेट रेड स्पॉट तूफान के समान है इस तूफान का आकार हमारी धरती के बराबर ही है।

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द वॉयजर 2 नेप्च्यून तक पहुंचने वाले एकमात्र अंतरिक्ष यान है। यह 1989 में इस ग्रह पर से होकर के गुजरा था, वहां पर इसने पृथ्वी की एक तस्वीर भी ली थी।

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नेपच्यून के पास 29,297 मील (47,150 किलोमीटर) का व्यास है ।यह सौर मंडल में यह तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। पहला ग्रह जूपिटर है तो दूसरा शनि ग्रह है।

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अन्य गैसी ग्रहों की तरह Neptune के भी छल्ले है। अब तक इसके 5 छल्लों की खोज हो चुकी है। न्युटन के छल्ले बृहस्पति के छल्लों की तरह धुंधले है और पृथ्वी पर से किसी दूरबीन द्वारा देखे जाने पर यह टूटे हुए(चाप की तरह) नज़र आते हैं।

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नेपच्यून में एक अद्वितीय मजबूत चुंबकीय क्षेत्र है यह धरती से 27 गुना मजबूत है। यह अन्य ग्रहों की तुलना में विशेष है क्योंकि यह ग्रह के axis के अनुरूप नहीं है और यह 47 डिग्री कोण पर झूका है। वर्तमान में नेपच्यून को आगे खोजने के लिए कोई मिशन नहीं है।

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इसका सबसे बड़ा उपग्रह है ट्राइटन (Triton) – इतना विशाल और भारी की नेपच्यून की कक्षा में स्थित समस्त द्रव्यमान का 99.5% अकेले ट्राइटन पूर्ण करता है. मतलब बाकी मिलाकर केवल 0.5% द्रव्यमान रखते है।

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Neptune के चांद ट्राइटन (Triton) के बारे में एक शानदार बात भी है कि यह बाकी उपग्रहों की तुलना में यह विपरीत दिशा में घूमता है और शायद नेपच्यून के निर्माण के समय बना उसका उपग्रह न होकर कोई क्षुद्र ग्रह हो जो नेपच्यून के गुरुर्वाकर्षण में फंस गया हो।