आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा

कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला

मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा

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पलकों से रास्ते के काटे हटा देंगे,

फूलों को क्या हम अपना दिल बिछा देंगे।

टूटने ना देंगे अपनी दोस्ती को कभी,

बदले में हम खुद को मिटा लेंगे।।

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