वो फिरते रहे दिल में ना जाने कितने राज लिये

हमने तो कभी उनसे जज्बातों को छुपाया ना था

जाने क्यों हम बेवजह मदहोश हुआ करते थे

जाम आँखों से तो कभी उसने पिलाया ना था

मीलों कब्ज़ा कर बना रखा था सपनों का महल पर

उसने वो ख़्वाब कभी आँखों में सजाया ना था

धड़कन ‘मौन’ हुई अब एक आह की आवाज़ है

शिकवा क्या उनसे जिसने कभी अपना बनाया ना था...........


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