Sawan Ki Shayari

Reshu

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बनके सावन कहीं वो बरसते रहे - Sawan shayari in Hindi.

बनके सावन कहीं वो बरसते रहे

इक घटा के लिए हम तरसते रहे

आस्तीनों के साये में पाला जिन्हें,

साँप बनकर वही रोज डसते रहे


Reshu

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वो तेरा शरमा के मुझसे यूँ लिपट जाना - Sawan shayari in Hindi

वो तेरा शरमा के मुझसे यूँ लिपट जाना,

कसम से हर महीने में सावन सा अहसास देता है !!


Reshu

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लाख बरसे झूम के सावन मगर वो बात कहाँ.. - Sawan shayari in Hindi.

लाख बरसे झूम के सावन मगर वो बात कहाँ..

जो ठंडक पङती है दिल में तेरे मुस्कुराने से ..


Reshu

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तूमनें बहुत बरसातें देखी है - Sawan shayari in Hindi.

मुझे मालूम है तूमनें बहुत बरसातें देखी है,

मगर मेरी इन्हीं आँखों से सावन हार जाता है…


Reshu

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वक़्त की जेब से ‘सावन’ चुरा लिया - Sawan shayari

पतझड़ दिया था वक़्त ने सौगात में मुझे..

मैने वक़्त की जेब से ‘सावन’ चुरा लिया…!!


Reshu

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अपनी-सी बरसात कहाँ - Sawan shayari in Hindi.

सावन-भादों साठ ही दिन हैं फिर वो रुत की बात कहाँ

अपने अश्क मुसलसल बरसें अपनी-सी बरसात कहाँ।।


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