उसने मिलने की अजीब शर्त रखी… 
गालिब चल के आओ सूखे पत्तों पे लेकिन कोई आहट न हो!

Click Here To Read Full Post

1215 Views

इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये..
कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता।

Click Here To Read Full Post

3619 Views

रोज़ ये दिल बेकरार होता है,
काश के तुम समझ सकते की
चुप रहने वालो को भी किसी से प्यार होता है...

Click Here To Read Full Post

5443 Views

तुम मुझे कभी दिल, कभी आँखों से पुकारो ग़ालिब,

ये होठो का तकलुफ्फ़ तो ज़माने के लिए है|

Click Here To Read Full Post

5567 Views

दुःख देकर सवाल करते हो,
तुम भी जानम कमाल करते हो,


देख कर पूछ लिया हाल मेरा,
चलो कुछ तो ख्याल करते हो,


शहर-ए दिल में ये उदासियाँ कैसी,
ये भी मुझसे सवाल करते हो,


मरना चाहें तो मर नहीं सकते,
तुम भी जीना मुहाल करते हो,


अब किस-किस की मिसाल दूँ तुम को,
हर सितम बे-मिसाल करते हो।
 -मिरजा गालि़ब साहब

Click Here To Read Full Post

3955 Views

उड़ने दे इन परिंदों को आज़ाद फिजां में ‘गालिब’
जो तेरे अपने होंगे वो लौट आएँगे

Click Here To Read Full Post

4791 Views

खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब,
मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह...

Click Here To Read Full Post

4417 Views

हाथो की लकीरों पे मत जा ए ग़ालिब,
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते|

Click Here To Read Full Post

5602 Views