Shayari - Poem

खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं,
जिसे भी देखिए यहाँ हैरान बहुत है।


करीब से देखा तो है रेत का घर,
दूर से मगर उनकी शान बहुत है।


कहते है सच का कोई सानी नही,
आज तो झूठ की आन बान बहुत है।


मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,
यूँ तो कहने को इंसान बहुत हैं।


वक्त पे न पहचाने ये अलग बात,
वैसे तो शहर में अपनी पहचान बहुत है।

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मचल के जब भी आँखों से छलक जाते हैं दो आँसू 
सुना है आबशारों को बड़ी तकलीफ़ होती है


खुदारा अब तो बुझ जाने दो इस जलती हुई लौ को 
चरागों से मज़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है
 
कहू क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे है 
क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ़ होती है


तुम्हारा क्या तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी 
मगर हम खांकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है

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लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

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