Shayari - Bewafa

आज हम उनको बेवफा बताकर आए है,
उनके खतो को पानी में बहाकर आए है,
कोई निकाल न ले उन्हें पानी से..
इस लिए पानी में भी आग लगा कर आए है।

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रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने,
कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने,
हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो,
अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।

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मुस्कुराते पलको पे सनम चले आते हैं,
आप क्या जानो कहाँ से हमारे गम आते हैं,
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं,
जहाँ किसी ने कहा था कि ठहरो हम अभी आते है।

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काश उन्हें चाहने का अरमान नही होता,
में होश में होकर भी अंजान नही होता,
ये प्यार ना होता, किसी पत्थर दिल से,
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता!

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दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे,
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे..

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वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे,
हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे,
हमें ही मिल गया खिताब-ए-बेवफा क्योंकि,
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे।

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अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो;
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।

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नादान इनकी बातो का एतबार ना कर,
भूलकर भी इन जालिमो से प्यार ना कर,
वो क़यामत तलक तेरे पास ना आयेंगे,
इनके आने का नादान तू इन्तजार ना कर!

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बेबस निगाहों में है तबाही का मंज़र,
और टपकते अश्क की हर बूंद
वफ़ा का इज़हार करती है........
डूबा है दिल में बेवफाई का खंजर,
लम्हा-ए-बेकसी में तसावुर की दुनिया
मौत का दीदार करती है..........
ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की... और कहेना,
के कफ़न की ख्वाहिश में मेरी लाश
उनके आँचल का इंतज़ार करती है..........

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